देशभक्ति करने का मौका

भईया जी अपनी भैस को दुह के उठे और दूध से आधी भरी बाल्टी को नल के नीचे रख के नल चालू कर दिया . पर उससे पानी नहीं आया, सरकारी था . भईया जी खुन्नस में बडबडाये – “जब सारा दूध बिक जायेगा, तब इसमें पानी आएगा.”

तभी उसना मोबाइल बज उठा – “कोई होता जिसको अपना , हम अपना कह लेते यारों ” ये उनका पसंदीदा रिंग टोन था. फ़ोन रिसीव कर के अभी ‘हल्लो’ भी नहीं कर पाए थे कि उधर से आवाज़ आई – “भईया जी ! मैं तोला राम , तुम्हे बचपन का दोस्त बोल रहा हूँ .”
“हाँ ! तो अब जवानी में फ़ोन करने कि क्या जरुरत आ पड़ी?” भईया जी ने पूछा .
तोलाराम ने समझाते हुये कहा – “अरे भाई ! नाराज़गी छोडो मैंने तुम्हरे फायदे के लिए फ़ोन किया है. “

“तो बोल्लो ना ! चार भैसे खड़ी रम्भा रही हैं, उनको दुहना है अभी. ”“भईया जी ! मुझे एक स्कूल में पंद्रह अगस्त पे खाना खिलने का टेंडर मिला है. उसके लिए मुझे दूध का आर्डर देना था. अब तुम ही मेरे बाल सखा हो, इसलिए तुमको मैंने फोन किया है. अस्सी लीटर दूध कि जरुरत है, कल सुबह ही गाडी भिजवा दूँगा. ”

“तुमने गाडी कब ली, तुम तो फटफटिया पे चलते थे ना?” भईया जी ने पूछा .

तोला राम खिलखिलाते हुये बोले – “सब दया है ‘उपरवाले’ की , प्रसाद चढ़ाया और फल प्राप्त हुआ और सरकारी कामो में तो खर्चा पाई का मुनाफा हज़ार का भी तो होता है.”

तोला राम की बात सुन के भईया जी दंग रहा गए. पूछने लगे – “अरे ! कुछ हमे भी तो बताओ.”

तोला राम बोले – “फोन से ज्यादा नहीं बता सकता हूँ. आजकल फोन टेपिंग बहुत बढ़ गयी है. कल पांच बजे गाडी तुम्हारे घर पहुँच जाएगी. सब तैयार रखना.”“पर, हमारी सारी भैंसे मिल कर भी चालीस लीटर दूध नहीं देती हैं. हम अस्सी लीटर का इंतजाम कैसे करेगे.”

“हद है यार !” – तोला राम भड़क गए – “घर में चाप कल है की नहीं है.”

“नहीं, सरकारी नल है और वो भी आज सुखा पड़ा है.” – भईया जी उदास होके बोले.

“चलो यार, तुम्हरे लिए पानी भिजवा देता हूँ. पर, इसके पैसे कट जायेंगे ! और सुनो, दूध तीन प्रकार का होना चाहिए. एक, विशेष अतिथि के लिए. दूसरा, शिक्षकों के लिए और बाकि का बच्चो को पिलाने के लिए. तुम भी आ जाना फंक्शन में, गेस्ट का पास मिल जायेगा और तुम्हारा चालीस किलो दूध, अस्सी किलो में खड़े खड़े बिकवा दिया, तो मेरा भी ख्याल रखना. अच्छा अभी फोन रखते हैं, बहुत काम है. जय हिंद! ”

भईया जी कुछ कहते, तब तक फ़ोन कट गया था. और ‘सों-सों’ के आवाज़ के साथ नल में पानी आने लगा था. भईया जी फोन को लुंगी में खोसते हुये बोले – “चलो ! पुरे साल देश को लूटने खसोटने के बाद, एक दिन तो देशभक्ति करने का मौका मिला.”

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