काला बिल्ला और सुसु पहलवान

आये हाय दोस्तों!  मैं काला बिल्ला एक बार फिर अपनी कहानी को आगे बढाता हूँ, जैसा की मैंने पहले बताया की कैसे लोगो ने मुझे नाले से निकाल कर घर पहूंचाया था. अब मैं उससे आगे की बात बताता हूँ ………………

नाले के गंदे पानी और बदबू से मैंने नहा कर निजात पा लिया था, शाम तो हो गयी थी मैंने सोंचा चलो बाजार से कुछ तफरी मार के आया जाए, और मैं मार्किट घुमने निकल पड़ा.

घर से निकलते ही कुछ दूर चलते ही मेरे पैर फिसला और मैं धडाम से गिर पड़ा ,. मेरा घर गली के आखिर में है और गली में साले सारे मूत मूत के कीचड़ फैला रखे थे. गली के आजू बाजू के सारे दीवालों के पर लोगो ने मूत मूत के दीवालों को Discolour बना रखा है. बदबू की तो पूछिये मत , और जमीन लोगो के मूत से इतनी गीली रहती है की सारे रास्ते में कीचड़ जैसा फैला रहता है. मैं उसी कीचड़ में धडाम से गिरा था और मेरे गिरते हैं कीचड़ का छीटा उड़ उड़ कर हवा में उछल गया था.

मैं मुंह के बल आगे की तरफ गिरा था और मेरे मुंह में थोडा सा कीचड़ घुस गया.. उस मूत वाले कीचड़ का टेस्ट बहुत ख़राब था. मैं तुरंत ही थू थू करने लगा और थोड़ी देर तक थू थू करता रहा. फिर मैंने अपने साफ़ सुथरे कपडे को देखा तो कीचड़ में सन गया था…मैं मन ही मन गरियाने लगा की साले गली में क्यों मूतते हैं.

अभी मन ही मन मैं गरिया ही रहा था की मेरे ऊपर गरमा गरम पानी की धर पड़ने लगी.  मैंने सोंचा चलो ये तो अच्चा ही हुआ की पानी की धार गिरने लगी है. मैंने फटाफट फटाफट उस पानी की धार से अपने कपडे और हाथ धो डाले. मैंने मुंह के अन्दर जो कीचड़ चली गयी है, उसको भी कुल्ला कर के साफ़ कर लूं. मगर तब तब तक पानी की धार आना बंद हो गया.

मैंने उस बन्दे, जिसने मेरी समस्या के समाधान के लिए पानी की व्यवस्था की थी, को थैंक यू बोलने के लिए सर उठाया तो ऊपर देखा की मोहल्ले के दो नन्हे मुन्हे लड़के खड़े हैं और जिन्होंने अभी अभी पेशाब करना बंद किया है. तभी मुझे ख्याल आया की जिसे में गरम पानी समझ रहा था दरअसल वो इन दोनों ने मुता था. फिर मैं जल्दी से ऊपर वाले का शुक्रिया अदा किया की अच्छा हुआ की इन दोनों का सुसु जल्दी ख़त्म हो गया वरना मैं तो कुल्ला भी करने वाला था..

उन्होंने एक तो मेरे ऊपर मूत दिया था मगर उनके कारण ही मैं अपने बदन पर लगे कीचड़ को साफ़ कर पाया था इसलिए मुझे समझ नहीं आ रहा था की मैं उन दोनों पर गुस्सा करूँ या धन्यबाद दूँ.

लेकिन मैंने थोडा झूठा गुस्सा दिखाते हुए बोला की मैं तुम दोनों को बहुत मारूंगा. बच्चिन ने पूछा – हमें मारने के लिए ऊपर आना पड़ेगा, कैसे आओगे बिल्ले?

मैंने कहा – अगली बार जब तुम मूतोगे तो तुम्हारे मूत को पकड़ का ही ऊपर चढ़ आऊंगा और फिर बहुत मारूंगा. मगर वो बच्चा भी कम समझदार नहीं था, बोला – तुम जैसे ही आधा दूर तक आओगे मैं मूतना ही बंद कर दूंगा और तुम फिर से धडाम से कीचड़ में गिरोगे…

मैंने सोंचा की लग रहा है इस बच्चे में पहली बार गिरते देख लिया है तभी वो बोल रहा है की धडाम से गिरोगे, मैंने सोंचा की अब यहाँ से निकल लेने में भी भलाई है. मैं वहाँ से खिसकने लगा. मगर बच्चे मुझे हूट करते रहे करते रहे, जब तक मैं गली पार कर के उनकी आँखों से ओझल ना हो गया……………

 

क्रमशः

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
(Visited 203 times, 1 visits today)