पहले शहनाईयां गूंजी थी अब गूंजेगी किलकारीयां

पुरे चार महीने से बारात और ढोल बाजों का दौर अब समाप्त होने के कगार पर था. पंडित जी के पतरा के अनुसार इस साल शादी व्याह के डेट भरपूर मात्रा में थे. उन्होंने सलाह भी दी थी, जिन जिन को शादी करनी है कर लो, इस बार बहुत सारे मुहूर्त हैं और हर मुहूर्त शुभ है. सब के सब फटाफट शादी कर लो, घोड़ी चढ़ लो..

पंडित जी की बात मान कर मोहल्ले के लगभग हर दुसरे घर में ढोल बजे थे, शहनाई बजी थी. मुफ्त में दावत उड़ाने वाले मुफ्त में दावत उड़ा चुके थे. लेकिन कुछ लोग थे, जिन्होंने दावत नहीं भी उड़ाई थी, उनका मानना था की उन्हें सही तरीके से दावत में नहीं बुलाया गया था. अब दावत उड़ाने का मौका देने वाला भी सोंच कर बैठ चूका था, तुम्हारे यहाँ भी तो दावत होगी कभी, फिर देखना तुम्हारी दावत मैं कैसे उड़ाता हूँ.

 

बारात में कई लोगो ने कमरिया करे लापलग लोलीपोप लागेलु सोंग पर कुर्ता फाड़ ऐसा डांस किया था, की उनकी दम फूलने की सारी बीमारी का इलाज उसी बारात में हो गया था.

पंडित जी  के सलाह पर इतने लोगो ने शादी व्याह कर लिए थे की गाँव मोहल्ले वालों के हाथो से अभी पिछली बारात के पकवानों की खुश्बू गयी भी नहीं रहती थी की अगले बारात की पंगत में लाइन लगा कर खड़े हो चुके रहते थे…

अब जब शादी व्याह का माहौल समाप्ति के कगार पर है, पंडित जी के चेले को बहुत ही चिंता होने लगी थी, की अब दावत कहाँ उड़ायेंगे. उसने ये प्रश्न अपने गुरु जी से कर डाली. गुरु जी ने अपने पुरे अनुभव के साथ अपने चेले को समझाने लगे.

बेटे! पिछले महीने में जितने भी शादियाँ हुईं हैं ना, आगे पीछे कर के अगले पुरे साल सबके घर में किलकारियां गूंजेगी. तब फिर से दावत की बहार आएगी मेरे बच्चे…

चेला , अपने गुरु की इस दूरदर्शिता पर अचंभित था. मगर उसे क्या पता था, ये उनके गुरु जी की दूरदर्शिता नहीं, गुरु जी का एक्सपीरियंस बोल रहा था.

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